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महर्षि वेदव्यास गुरुकुल विद्यापीठ

हमें जानिये

असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय का सुपथ दर्शने वाले, जन मानस के हृदयों को अपनी पवित्र वाणी से ज्ञान स्पन्दित करने वाले विश्व जागृति मिशन के संस्थापक, सत्य धर्म सौहार्द के पुरोधा पूज्य चरण परम संत श्री सुधांशु जी महाराज के कोमल कांत हृदय में एक भाव जागा कि भारत के प्राचीन वेदों, उपनिषदों, पुराणों, गीता आदि महान ग्रन्थों में प्रदत्त एवं ऋषियों-मुनियों के ज्ञान को सनातन धर्म के विशुद्ध चिन्तन के अनुकूल जन-जन तक एकरूपता में पहुंचाया जाये, इस भावना से महाराजश्री के मन में भाव अंकुरित हुआ कि पूरे भारत में उपदेशक, धर्मप्रचारक तैयार करने हेतु विद्यालयों की, गुरुकुलों की स्थापना हो जहां पर सुयोग्य कुशल शिक्षकों द्वारा छात्रों को प्रशिक्षण देकर धर्माचार्य के रूप में समाज सुधार के लिए तैयार किया जाये। वे लोग गुरुकुल में तप कर, ऊर्जा प्राप्त कर, प्राचीन ग्रन्थों, वर्तमान का ज्ञान प्राप्त करके धर्म का प्रचार करें। सभी विषयों के साथ-साथ तकनीकि ज्ञान विज्ञान का भी उन्हें ज्ञान होना चाहिए। उन्हें इतिहास से लेकर वेदों, उपनिषदों, स्मृति ग्रंथों आदि की विधिवत सम्यक जानकारी होनी चाहिए।

इस विद्यापीठ में संस्कृति की महान क्रान्ति घटित हुई। जब सम्पूर्ण भारत से मेधावी छात्रों का चयन किया गया। एम.ए., पी.एच.डी., आचार्य शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों को वैदिक वाड्मय, आध्यात्मिक ज्ञान-विज्ञान, श्रुति-स्मृति, शास्त्र मनोविज्ञान, इतिहास एवं साहित्य के साथ-साथ उनमें नेतृत्व-वक्तृत्व-शक्ति भी जागृत की गई।

यहां प्रशिक्षित सुयोग्य धर्माचार्य प्रवचन, योग, यज्ञ, मंच संचालन, भजन, संकीर्तन, योग-साधना आदि सभी कार्यों को कुशलता पूर्वक सम्पन्न कराके देश-विदेशों में गुरु से प्राप्त अध्यात्म ज्ञान से जनमानस को आलोकित कर रहे हैं, आन्दोलित कर रहे हैं। इन्हीं धर्माचार्यों ने अनेकबार समाजोपयोगी, पर्यावरण संरक्षण, मद्यनिषेघ, नारी उत्थान आदि नुक्कड़ नाटकों का सफल मंचन भी किया है।

महर्षि वेदव्यास गुरुकुल विद्यापीठ आनंदधम आश्रम में स्थित है। यह भारत की राजधनी नई दिल्ली के पश्चिम क्षेत्र में स्वच्छ व प्रदुषण रहित वातावरण में स्थापित है। बाहरी रिंग रोड से 10 किलामीटर और नांगलोई मोड़ से 1 किलोमीटर की दूरी और मुंडका मैट्रो स्टेशन से भी 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आनंदधम आश्रम की पुण्यभूमि सात्विक वातावरण में स्थित गुरुकुल, मंदिर, यज्ञशाला, सिद्धशिखर, मानसरोवर झील, गौशाला, करुणासिंधु धर्मार्थ अस्पताल एवं अन्य संस्थाओं की उपस्थिति में पूज्य महाराजश्री का वरदान है।