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महर्षि वेदव्यास गुरुकुल विद्यापीठ

हमारी अन्य प्रतिबद्धताएं

इस पुण्यगुरुकुल की स्थापना करते हुए महाराजश्री ने कहा था - ‘‘ भवनों के निर्माण से भी बढ़कर भावनाओं के केन्द्र व्यक्ति के निर्माण का कार्य महत्वपूर्ण है। इस गुरुकुल में प्रशिक्षित छात्र ऋषि परम्परा के संवाहक हैं। अपने राष्ट्र की संस्कृति, सभ्यता, सदाचार, सहिष्णुता आदि सद्गुणों को अपने में धारण करके वे सुसंकल्पित होकर राष्ट्र के गौरव को बढ़ा रहे हैं, इनके कंधों पर ही भारत की वैदिक धरोहर स्थापित है, ये देश के भावी कर्णधार हैं, इनसे समाज को बहुत अपेक्षाएं हैं। यह भारत को विश्व गुरु बनाने वाले बनेंगे। ये विद्यार्थी ही महाराजश्री के स्वप्नों को, संकल्पों को मूर्त रूप देने वाले बनेंगे इनके ही पग चिन्हों का देश अनुकरण करेगा। यह धर्म मार्ग के प्रहरी हैं, जो परमपूज्य गुरुदेव जी की छत्रछाया में सम्पूर्ण विश्व में धर्म की पताका फहरा रहे हैं।

देवदूत बाल कल्याण महाभियान

भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए विश्व जागृति मिशन एक बहुत बड़ी ‘‘बाल विकास योजना’’ संचालित कर रहा है। भारत में 4 करोड़ से अध्कि अनाथ और अनाश्रित बालक-बालिकायें हैं जिनका संरक्षण एवं शिक्षण इस युग की महती आवश्यकता है। इस क्षेत्र में विश्व जागृति मिशन द्वारा किया जा रहा प्रयास सराहनीय हैं,

1) देवदूत बालाश्रम- सूरत विषम परिस्थितियों से निकलकर अनाथ व बेसहारा बच्चे फलें-फूलें एवं देश के सुयोग्य नागरिक बनें, इसी संकल्प से आपने सूरत (गुजरात) एवं कानपुर (उ.प्र.) में अनाथालयों की स्थापना की। इन बालाश्रमों में तीन सौ के करीब बच्चों के रहन-सहन, शिक्षा-दीक्षा की सारी व्यवस्था प्रेमपूर्ण वातावरण में होती है। इन्हें स्कूली शिक्षा के साथ-साथ योगासन, जूडो-कराटे और अन्य खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों की शिक्षा भी दी जाती है। धर्म, संस्कार एवं परंपराओं से भी इन्हें परिचित कराया जाता है।

2) देवदूत बालश्रम- कानपुर सिद्धिधाम आश्रम, बिठूर, कानपुर (उत्तर प्रदेश) में विश्व जागृति मिशन द्वारा बालाश्रम (अनाथालय) चलाया जा रहा है। इस बालाश्रम में वे बच्चे जिनके मन में बहुत बड़े-बड़े सपने हैं, कुछ कर दिखाने का जज्बा भी है, उनकी मासूम और भोली सूरत देखते ही हृदय में प्यार उभरता है, वे सब होनहार प्रतिभा के धनी हैं। अनुशासन में रहकर सुंदर वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्हें अच्छे स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है, खेल-कूद के साथ-साथ उन्हें योगासन, जूडो-कराटे की शिक्षा भी दी जा रही है। यज्ञ आदि में भी बच्चे नियमित रूप से भाग लेते हैं। उन्हें धर्मिक एवं संस्कारवान बनाया जा रहा है। क्या हुआ जो इन देवदूत बालकों को मां-बाप का साया प्राप्त नहीं हुआ, भगवान ने इन बच्चों को प्रेम और करुणा की मूर्ति पूज्य सद्गुरुजी महाराज की शरण प्रदान की है।

3) ज्ञानदीप विद्यालय फरीदाबाद (हरियाणा) - कूड़े-कचरे के बीच प्लास्टिक और लोहा आदि ढूँढते बच्चे, बाल मजदूरी करते और भीख मांगते बच्चे भी इस युग की घोर विडंबना हैं, जिसका निवारण समाज को करना ही चाहिए। ऐसे ही अत्यंत निर्धन बालक-बालिकाओं के लिए आपने फरीदाबाद (हरियाणा) में ज्ञानदीप विद्यालय स्थापित किया, जिसमें 1000 बालक-बालिकाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ पवित्रा संस्कार भी प्रदान किए जा रहे हैं। ज्ञानदीप विद्यालय के सभी बच्चों की वर्दी, पुस्तक, स्टेशनरी, अल्पाहार आदि की समुचित व्यवस्था विश्व जागृति मिशन द्वारा की जाती है।

4) आदिवासी क्षेत्र में पब्लिक स्कूल - करुणा की प्रतिमूर्ति पूज्यश्री झारखंड के वनवासी क्षेत्र में वन बंधुओं की दुर्दशा देखकर द्रवित हो गए। आपने उनकी बेबसी को देखा, उनके मासूम बच्चों को देखा, उनके अभावग्रस्त जीवन को देखा। साधन-सुविधाओं से रहित गहन जंगलों में नक्सलवादियों के भय से छिपते-छिपाते भूखे-प्यासे उन लोगों की पीड़ा को आपने महसूस किया। उनके कल्याण हेतु रांची (झारखंड) के निकट रुक्का एवं खूंटी में 2 शिक्षण संस्थान प्रारंभ किये, जिनमें सैकड़ों बालक-बालिकाओं को संरक्षण एवं शिक्षा प्रदान की जा रही है।

विश्व जागृति मिशन इन सब बच्चों का संपूर्ण खर्च वहन करता है।

इस महान सेवा कार्य के लिए हर भक्त आगे आएं, अपना-अपना हाथ बढ़ाएं, अपनी नेक कमाई में से कुछ अंश हवि रूप में अर्पित करें, बाल विकास की इस दिव्य योजना के द्वारा विश्व मंगल का सपना साकार होगा।